11 Money and banking (Irving Fisher · Milton Friedman · Robert Mundell · John Maynard Keynes)
📊 Irving Fisher · Milton Friedman · Robert Mundell · John Maynard Keynes
प्रकाशन वर्ष (Publication Year), अतिरिक्त महत्वपूर्ण बातें, और पिछली जानकारी को सही करते हुए | UGC NET Economics
⚠️ सबसे पहले, मैं अपनी पिछली गलती सुधारता हूँ:
· पिछली बार मैंने कहा था कि Keynes को Nobel Prize नहीं मिला। यह सही है।
· लेकिन मैंने पिछली बार यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं किया था कि उनकी मृत्यु 1946 में हो गई थी और Nobel Prize in Economics 1969 में शुरू हुआ। इस बार मैं यह साफ-साफ लिखूंगा।
· पिछली बार मैंने कहा था कि Keynes को Nobel Prize नहीं मिला। यह सही है।
· लेकिन मैंने पिछली बार यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं किया था कि उनकी मृत्यु 1946 में हो गई थी और Nobel Prize in Economics 1969 में शुरू हुआ। इस बार मैं यह साफ-साफ लिखूंगा।
1. Irving Fisher (1867–1947)
📘 प्रमुख किताबें (प्रकाशन वर्ष सहित)
| पुस्तक का नाम | प्रकाशन वर्ष | महत्व |
|---|---|---|
| The Purchasing Power of Money | 1911 | इसमें फिशर समीकरण (MV = PT) दिया। |
| The Rate of Interest | 1907 | ब्याज दर का सिद्धांत |
| The Debt-Deflation Theory of Great Depressions | 1933 | 1929 की महामंदी के लिए कर्ज-अपस्फीति सिद्धांत दिया |
🏆 नोबेल पुरस्कार
❌ नहीं मिला (उनके समय नोबेल अर्थशास्त्र पुरस्कार 1969 में शुरू हुआ)
🧠 मुख्य थ्योरी: फिशर समीकरण (MV = PT) और फिशर प्रभाव (Fisher Effect)
M × V = P × T
- M = मुद्रा की मात्रा (Currency + Demand Deposits – M₁)
- V = मुद्रा के चलने का वेग (Velocity)
- P = कीमत स्तर (Price Level)
- T = लेनदेन की मात्रा (Total Transactions)
Nominal Interest Rate = Real Interest Rate + Inflation Rate
🧾 मान्यताएँ (Acceptance)
- अमेरिका में 1920 के दशक में – फेडरल रिजर्व ने इस सिद्धांत का उपयोग किया।
क्लासिकल अर्थशास्त्र का मुख्य आधार बना।
मुद्रास्फीति समझने का पहला वैज्ञानिक सूत्र माना गया।
⚠️ आलोचनाएँ (Criticism)
| आलोचक | मुख्य बात |
|---|---|
| Keynes | V स्थिर नहीं रहता, लोग पैसा बचाकर रखते हैं (Liquidity Preference) |
| Cambridge School (Pigou, Marshall) | लोग पैसा सिर्फ लेनदेन के लिए नहीं रखते, बल्कि तरलता के लिए भी |
| Empirical Studies (1960s के बाद) | V बहुत उतार-चढ़ाव दिखाता है |
🔁 किसने थ्योरी को आगे बढ़ाया?
- Milton Friedman – ने इसे Monetarism में बदला। उन्होंने कहा – V स्थिर नहीं है, लेकिन पूर्वानुमान योग्य है।
Chicago School – फ्राइडमैन ने Fisher के समीकरण को M × V = P × Y (Y = Real Output) में बदला।
👎 किसने क्रिटिसाइज किया?
- Keynes – General Theory (1936) ने Fisher को लगभग खत्म कर दिया।
Post-Keynesian (Hyman Minsky, Paul Davidson) – ने कहा – पैसा केवल विनिमय का माध्यम नहीं, बल्कि संपत्ति भी है।
🏦 मनी और बैंकिंग से संबंध:
RBI की मुद्रा आपूर्ति (M₃) – सीधे Fisher के समीकरण से जुड़ी।
महँगाई का अनुमान (Inflation Forecasting) – RBI आज भी MV = PT का उपयोग करती है।
CRR, SLR, OMO – इनसे RBI, M को कंट्रोल करती है।
RBI की मुद्रा आपूर्ति (M₃) – सीधे Fisher के समीकरण से जुड़ी।
महँगाई का अनुमान (Inflation Forecasting) – RBI आज भी MV = PT का उपयोग करती है।
CRR, SLR, OMO – इनसे RBI, M को कंट्रोल करती है।
✅ त्वरित याद: "Fisher कहते – पैसा बढ़ा, कीमत बढ़ी, चीज़ें वही रहीं।"
2. Milton Friedman (1912–2006)
📘 प्रमुख किताबें (प्रकाशन वर्ष सहित)
| पुस्तक का नाम | प्रकाशन वर्ष | महत्व |
|---|---|---|
| A Monetary History of the United States | 1963 | यह सबसे प्रसिद्ध है। |
| Capitalism and Freedom | 1962 | मुक्त बाजार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर |
| Free to Choose | 1980 | लोकप्रिय पुस्तक (TV series भी बनी) |
🏆 नोबेल पुरस्कार
✅ 1974 – "उपभोग विश्लेषण, मौद्रिक इतिहास और स्थिरीकरण नीति पर काम के लिए"
🧠 मुख्य थ्योरी: Monetarism (मुद्रावाद) और Permanent Income Hypothesis
"मुद्रास्फीति हमेशा और हर जगह एक मौद्रिक घटना है।"
- फ्राइडमैन ने फिशर समीकरण को बदला – M × V = P × Y (Y = Real GDP)
- प्राकृतिक बेरोजगारी दर (NAIRU)
- तरलता जाल (Liquidity Trap) को खारिज किया
"रिजर्व बैंक को मुद्रा आपूर्ति हर साल स्थिर दर (3-4%) से बढ़ानी चाहिए।"
🧾 मान्यताएँ (Acceptance)
- 1970-80 के दशक में – UK की Margaret Thatcher और US के Ronald Reagan ने इसे अपनाया।
RBI ने 1990 के दशक में – मुद्रा आपूर्ति पर ध्यान देना शुरू किया।
⚠️ आलोचनाएँ (Criticism)
| आलोचक | मुख्य बात |
|---|---|
| Keynesian Economists (Paul Krugman, Joseph Stiglitz) | V स्थिर नहीं है, मंदी में बेकार है |
| James Tobin | शेयर बाजार और संपत्तियाँ भी महँगाई को प्रभावित करती हैं |
| Empirical Evidence (1980 के बाद) | M और P के बीच संबंध कमजोर दिखा |
🏦 मनी और बैंकिंग से संबंध:
RBI की मौद्रिक नीति का आधार – M₃ पर नज़र रखना।
CRR, रेपो रेट – मुद्रा आपूर्ति (M₃) को कंट्रोल करने के लिए।
RBI की मौद्रिक नीति का आधार – M₃ पर नज़र रखना।
CRR, रेपो रेट – मुद्रा आपूर्ति (M₃) को कंट्रोल करने के लिए।
✅ त्वरित याद: "Friedman कहते – पैसे मत बिखेरो, रेट तय रखो; महँगाई खुद रुकेगी, मंदी भी न सताएगी।"
3. Robert Mundell (1932–2021)
📘 प्रमुख किताबें (प्रकाशन वर्ष सहित)
| पुस्तक का नाम | प्रकाशन वर्ष | महत्व |
|---|---|---|
| Man and Economics | 1968 | — |
| International Economics | 1968 | — |
🏆 नोबेल पुरस्कार
✅ 1999 – "विनिमय दर क्षेत्रों के विश्लेषण और मौद्रिक व राजकोषीय नीति के अंतर्राष्ट्रीय मॉडल के लिए"
🧠 मुख्य थ्योरी: Mundell–Fleming Model (IS-LM-BP)
"खुली अर्थव्यवस्था में नीति का असर विनिमय दर व्यवस्था पर निर्भर करता है।"
- IS – वस्तु बाजार (Goods Market)
- LM – मुद्रा बाजार (Money Market)
- BP – भुगतान संतुलन (Balance of Payments)
"एक ही समय में तीन चीज़ें साथ नहीं रख सकते: स्थिर विनिमय दर, मुक्त पूंजी आवाजाही, और स्वतंत्र मौद्रिक नीति" → Impossible Trinity (Trilemma)
🧾 मान्यताएँ (Acceptance)
- IMF, RBI, Fed – सब इस मॉडल का उपयोग करते हैं।
भारत का मैनेज्ड फ्लोट एक्सचेंज रेट – इसी मॉडल के अनुसार चलता है।
🏦 मनी और बैंकिंग से संबंध:
RBI का फॉरेन करेंसी रिजर्व मैनेजमेंट – इसी मॉडल पर टिका है।
मौद्रिक नीति की स्वतंत्रता और रुपए की स्थिरता में संतुलन – मुंडेल का त्रिलेमा यहाँ काम करता है।
RBI का फॉरेन करेंसी रिजर्व मैनेजमेंट – इसी मॉडल पर टिका है।
मौद्रिक नीति की स्वतंत्रता और रुपए की स्थिरता में संतुलन – मुंडेल का त्रिलेमा यहाँ काम करता है।
✅ त्वरित याद: "Mundell कहते – rate तय हो या छोड़ा, नीति का असर अलग-अलग होड़ा।"
4. John Maynard Keynes (1883–1946)
📘 प्रमुख किताबें (प्रकाशन वर्ष सहित)
| पुस्तक का नाम | प्रकाशन वर्ष | महत्व |
|---|---|---|
| The Economic Consequences of the Peace | 1919 | प्रथम विश्व युद्ध के बाद की संधि की आलोचना |
| The General Theory of Employment, Interest and Money | 1936 | सबसे प्रसिद्ध – Macroeconomics की नींव |
🏆 नोबेल पुरस्कार
❌ नहीं मिला – क्योंकि उनकी मृत्यु 1946 में हो गई और नोबेल पुरस्कार अर्थशास्त्र में 1969 में शुरू हुआ। (यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है – कमी के कारण नहीं, बल्कि समय से पहले चले जाने के कारण)
🧠 मुख्य थ्योरी: Keynesian Economics (माँग प्रबंधन)
"मंदी में सरकार खर्च बढ़ाए, ब्याज दर घटाए, लोन लेकर भी माँग बढ़ाए।"
- a) कुल माँग (Aggregate Demand) ही मुख्य है
- b) अपूर्ण रोजगार संतुलन (Underemployment Equilibrium)
- c) ब्याज दर और पैसे की माँग (Liquidity Preference Theory)
- d) मल्टीप्लायर (Multiplier): K = 1 / (1 – MPC)
- e) तरलता जाल (Liquidity Trap)
- f) छिद्रित मजदूरी (Sticky Wages)
🧾 मान्यताएँ (Acceptance)
- 1940-1970 – Keynesian Era – अमेरिका और UK ने इसे अपनाया।
2008 के वैश्विक संकट में – फिर से Keynesian नीतियाँ लागू की गईं।
⚠️ आलोचनाएँ (Criticism)
| आलोचक | मुख्य बात |
|---|---|
| Friedman (Monetarists) | सरकारी खर्च से निजी निवेश कम होता है (Crowding Out) |
| Friedrich Hayek (Austrian School) | सरकारी नियंत्रण से स्वतंत्रता खत्म होती है |
| Robert Lucas, Thomas Sargent (New Classical) | लोग अनुमान लगा लेते हैं, सरकारी नीति बेअसर हो जाती है (Rational Expectations) |
🏦 मनी और बैंकिंग से संबंध:
RBI की पूरी मौद्रिक नीति Keynes के सिद्धांत पर टिकी है।
LAF (Repo, Reverse Repo), MSF – यह Keynes के तरलता सिद्धांत का हिस्सा है।
Liquidity Trap – जब RBI रेपो रेट घटाकर माँग नहीं बढ़ा पाती।
CRR और SLR का उपयोग – मुद्रा आपूर्ति और तरलता को कंट्रोल करने के लिए।
RBI की पूरी मौद्रिक नीति Keynes के सिद्धांत पर टिकी है।
LAF (Repo, Reverse Repo), MSF – यह Keynes के तरलता सिद्धांत का हिस्सा है।
Liquidity Trap – जब RBI रेपो रेट घटाकर माँग नहीं बढ़ा पाती।
CRR और SLR का उपयोग – मुद्रा आपूर्ति और तरलता को कंट्रोल करने के लिए।
✅ त्वरित याद: "Keynes कहते – माँग बढ़ाओ, ब्याज घटाओ, मंदी भगाओ।"
✅ नोबेल पुरस्कार सारणी (स्पष्टीकरण सहित)
| अर्थशास्त्री | नोबेल | वर्ष | कारण / स्पष्टीकरण |
|---|---|---|---|
| Irving Fisher | ❌ | — | Nobel Prize in Economics 1969 में शुरू हुआ, उनकी मृत्यु 1947 में |
| Milton Friedman | ✅ | 1974 | Consumption analysis, monetary history, stabilization policy |
| Robert Mundell | ✅ | 1999 | Exchange rate analysis, optimal currency areas |
| John Maynard Keynes | ❌ | — | मृत्यु 1946 – Nobel Economics 1969 में शुरू (समय से पहले चले गए) |
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