16 International economis ( Terms of trade family)
📦 TERMS OF TRADE FAMILY — 4 अर्थशास्त्री
टॉसिग · डोरेंस · प्रीबिश · सिंगर
🔥 मास्टर ट्रिक : "ट डो प्र सि" | अंग्रेजी: "T D P S"
✅ एक लाइन में : टॉसिग (सकल मात्रा) → डोरेंस (आय ToT) → प्रीबिश (ToT गिरती है) → सिंगर (वैश्विक डेटा सिद्ध)
✅ एक लाइन में : टॉसिग (सकल मात्रा) → डोरेंस (आय ToT) → प्रीबिश (ToT गिरती है) → सिंगर (वैश्विक डेटा सिद्ध)
📦 बॉक्स 1 – फ्रैंक विलियम टॉसिग (Frank William Taussig, 1859-1940)
🔹 एक लाइन में
व्यापार शर्तों (Terms of Trade) को मापने का सबसे पुराना और सरल तरीका – निर्यात मात्रा सूचकांक और आयात मात्रा सूचकांक का अनुपात। यह बताता है कि एक निश्चित मात्रा में निर्यात करके कितनी मात्रा में आयात प्राप्त किया जा सकता है।🔹 क्यों आया?
टॉसिग से पहले व्यापार शर्तों को मापने का कोई व्यवस्थित सूत्र नहीं था। टॉसिग ने पहली बार गणितीय सूत्र दिया – Gross Barter Terms of Trade (GBTT)।🔹 कब और कहाँ?
1927, अमेरिका। पुस्तक – International Trade🔹 सूत्र (परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है)
Gross Barter Terms of Trade (GBTT) = (निर्यात मात्रा सूचकांक / आयात मात्रा सूचकांक) × 100
या GBTT = (Qx / Qm) × 100
जहाँ: Qx = निर्यात मात्रा सूचकांक (Export Quantity Index), Qm = आयात मात्रा सूचकांक (Import Quantity Index)या GBTT = (Qx / Qm) × 100
🔹 सरल उदाहरण
मान लो भारत का निर्यात मात्रा सूचकांक (Qx) = 120, आयात मात्रा सूचकांक (Qm) = 100GBTT = (120 / 100) × 100 = 120
व्याख्या: GBTT = 120 का मतलब है कि भारत को पहले से 20% अधिक आयात मात्रा उसी निर्यात मात्रा के बदले में मिल रही है। GBTT बढ़ना = लाभदायक (क्योंकि कम निर्यात करके ज्यादा आयात मिल रहा है)।
🔹 टॉसिग के 3 मुख्य व्यापार शर्तें सूत्र (परीक्षा में बार-बार)
Net Barter ToT (भाव व्यापार शर्तें) = (Px / Pm) × 100 – कीमतों का अनुपातGross Barter ToT (सकल वस्तु विनिमय) = (Qx / Qm) × 100 – मात्राओं का अनुपात
Income ToT (आय व्यापार शर्तें) = (Px / Pm) × Qx – भाव × मात्रा
🔹 मान्यताएँ (Assumptions)
1. दो देश, दो वस्तुएँ (सरल मॉडल)।2. निर्यात और आयात की मात्राएँ सटीक रूप से मापी जा सकती हैं।
3. गुणवत्ता में कोई बदलाव नहीं होता।
4. कोई टैरिफ या कोटा नहीं।
5. परिवहन लागत शून्य।
🔹 सीमाएँ (Criticism)
1. गुणवत्ता में बदलाव को नज़रअंदाज़ करता है – एक कार आज पहले से बेहतर है, लेकिन मात्रा वही।2. मात्राओं का मापन मुश्किल है – विभिन्न वस्तुओं को एक सूचकांक में कैसे जोड़ें?
3. नई वस्तुओं (जैसे iPhone) को पुराने सूचकांक में शामिल करना मुश्किल है।
4. यह कीमतों में बदलाव को नहीं मापता – केवल मात्राएँ देखता है।
🔹 ट्रिक याद रखने की
"Taussig = T for Quantity (मात्रा)" – टॉसिग ने मात्रा का अनुपात दिया।"Gross = Goods (वस्तुओं) की मात्रा"
"GBTT बढ़ा = लाभ बढ़ा"
🔹 नोबेल?
❌ नहीं (टॉसिग का 1940 में निधन, नोबेल 1901 से शुरू लेकिन अर्थशास्त्र का नोबेल 1969 से)🔹 अतिरिक्त बातें
· टॉसिग अमेरिकी अर्थशास्त्री थे।· वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे।
· उन्होंने टॉसिग क्वार्टरली पत्रिका की स्थापना की।
· वह अमेरिकी टैरिफ आयोग के अध्यक्ष भी रहे।
· उनके प्रसिद्ध छात्रों में जोसेफ शुम्पीटर भी थे।
· उनकी पुस्तक International Trade (1927) इस क्षेत्र की क्लासिक है।
❓ बॉक्स 1 के प्रश्न-उत्तर (F.W. Taussig)
प्रश्न 1: Gross Barter Terms of Trade किसने दिया?
उत्तर: फ्रैंक विलियम टॉसिग (F.W. Taussig) ने 1927 में।
उत्तर: फ्रैंक विलियम टॉसिग (F.W. Taussig) ने 1927 में।
प्रश्न 2: Gross Barter ToT का सूत्र क्या है?
उत्तर: (निर्यात मात्रा सूचकांक / आयात मात्रा सूचकांक) × 100 या (Qx / Qm) × 100।
उत्तर: (निर्यात मात्रा सूचकांक / आयात मात्रा सूचकांक) × 100 या (Qx / Qm) × 100।
प्रश्न 3: GBTT बढ़ने का क्या मतलब है?
उत्तर: उसी निर्यात मात्रा के बदले में अधिक आयात मात्रा मिल रही है → देश के लिए लाभदायक।
उत्तर: उसी निर्यात मात्रा के बदले में अधिक आयात मात्रा मिल रही है → देश के लिए लाभदायक।
प्रश्न 4: टॉसिग की मुख्य पुस्तक कौन सी है?
उत्तर: International Trade (1927)
उत्तर: International Trade (1927)
प्रश्न 5: क्या टॉसिग को नोबेल मिला?
उत्तर: नहीं।
उत्तर: नहीं।
प्रश्न 6: टॉसिग ने और कौन से ToT सूत्र दिए?
उत्तर: Net Barter ToT (भाव व्यापार शर्तें) और Income ToT (आय व्यापार शर्तें)।
उत्तर: Net Barter ToT (भाव व्यापार शर्तें) और Income ToT (आय व्यापार शर्तें)।
प्रश्न 7: Net Barter ToT का सूत्र क्या है?
उत्तर: (Px / Pm) × 100 – यह कीमतों का अनुपात मापता है।
उत्तर: (Px / Pm) × 100 – यह कीमतों का अनुपात मापता है।
प्रश्न 8: इस सूत्र की एक सीमा बताएँ।
उत्तर: यह गुणवत्ता में बदलाव को नज़रअंदाज़ करता है।
उत्तर: यह गुणवत्ता में बदलाव को नज़रअंदाज़ करता है।
प्रश्न 9: टॉसिग किस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे?
उत्तर: हार्वर्ड विश्वविद्यालय।
उत्तर: हार्वर्ड विश्वविद्यालय।
प्रश्न 10: टॉसिग के एक प्रसिद्ध छात्र का नाम बताएँ।
उत्तर: जोसेफ शुम्पीटर (Joseph Schumpeter)।
उत्तर: जोसेफ शुम्पीटर (Joseph Schumpeter)।
📦 बॉक्स 2 – ग्रीम डोरेंस (Graeme Dorrance, 1925)
🔹 एक लाइन में
आय व्यापार शर्तें (Income Terms of Trade) यह मापती है कि किसी देश की निर्यात आय (export revenue) कितनी वस्तुएँ आयात कर सकती है। यह भाव व्यापार शर्तों (Net Barter ToT) और निर्यात मात्रा (export quantity) दोनों को ध्यान में रखता है।🔹 क्यों आया?
टॉसिग का Gross Barter ToT केवल मात्राएँ देखता था, जबकि Net Barter ToT केवल कीमतें देखता था। डोरेंस ने कहा – दोनों को मिलाकर एक बेहतर माप बनाना चाहिए। आय व्यापार शर्तें देश की वास्तविक आयात क्षमता को दर्शाती हैं।🔹 कब और कहाँ?
1960, ऑस्ट्रेलिया। लेख – "The Income Terms of Trade" (अर्थशास्त्र पत्रिकाओं में)🔹 सूत्र (परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है)
Income Terms of Trade (ITT) = Net Barter ToT × निर्यात मात्रा सूचकांक
या ITT = (Px / Pm) × Qx
जहाँ: Px = निर्यात मूल्य सूचकांक, Pm = आयात मूल्य सूचकांक, Qx = निर्यात मात्रा सूचकांकया ITT = (Px / Pm) × Qx
📌 सरल उदाहरण: मान लो भारत: Px=120, Pm=100, Qx=110 → Net Barter ToT=(120/100)×100=120, Income ToT = 120 × (110/100)=132। ITT=132 का मतलब है कि भारत की वास्तविक आयात क्षमता में 32% की वृद्धि हुई है (कीमत और मात्रा दोनों के प्रभाव से)।
🔹 विभिन्न व्यापार शर्तों का तुलनात्मक सारांश (परीक्षा में बार-बार)
Net Barter ToT = (Px/Pm)×100 – कीमतों का अनुपात – टॉसिगGross Barter ToT = (Qx/Qm)×100 – मात्राओं का अनुपात – टॉसिग
Income ToT = (Px/Pm)×Qx – वास्तविक आयात क्षमता – डोरेंस
Double Factoral ToT = (Px/Pm)×(Zx/Zm) – उत्पादकता परिवर्तन – वाइनर
🔹 मान्यताएँ (Assumptions)
1. गुणवत्ता में कोई बदलाव नहीं होता।2. मूल्य और मात्रा सूचकांक सटीक रूप से मापे जा सकते हैं।
3. निर्यात मात्रा में बदलाव से कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता (छोटा देश मानकर)।
🔹 सीमाएँ (Criticism)
1. यह गुणवत्ता में बदलाव को नज़रअंदाज़ करता है।2. मूल्य सूचकांक का चुनाव (Paasche vs Laspeyres) परिणाम को प्रभावित करता है।
3. यह पूंजी प्रवाह और ऋण को ध्यान में नहीं रखता – केवल व्यापार देखता है।
4. बड़े देश के लिए यह सूत्र कम सटीक है – क्योंकि निर्यात मात्रा बढ़ने से कीमतें घट सकती हैं।
🔹 ट्रिक याद रखने की
"Dorrance = D for Demand (आयात क्षमता)" – डोरेंस ने आयात क्षमता मापी।"ITT = Net Barter × Quantity" – दोनों का गुणा।
"Income ToT = कितना आयात कर सकते हो"
🔹 नोबेल?
❌ नहीं (डोरेंस को नोबेल नहीं मिला)🔹 अतिरिक्त बातें
· डोरेंस ऑस्ट्रेलियाई अर्थशास्त्री थे।· उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में काम किया।
· वह बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड से भी जुड़े रहे।
· उन्होंने मौद्रिक अर्थशास्त्र और अंतर्राष्ट्रीय वित्त पर भी महत्वपूर्ण काम किया।
· उनका Income ToT आज भी विकासशील देशों के व्यापार विश्लेषण में उपयोग किया जाता है।
❓ बॉक्स 2 के प्रश्न-उत्तर (Graeme Dorrance)
प्रश्न 1: Income Terms of Trade किसने दिया?
उत्तर: ग्रीम डोरेंस (Graeme Dorrance) ने 1960 में।
उत्तर: ग्रीम डोरेंस (Graeme Dorrance) ने 1960 में।
प्रश्न 2: Income ToT का सूत्र क्या है?
उत्तर: (Px / Pm) × Qx या Net Barter ToT × निर्यात मात्रा सूचकांक।
उत्तर: (Px / Pm) × Qx या Net Barter ToT × निर्यात मात्रा सूचकांक।
प्रश्न 3: Income ToT क्या मापता है?
उत्तर: देश की वास्तविक आयात क्षमता (कीमतों और मात्रा दोनों के प्रभाव सहित)।
उत्तर: देश की वास्तविक आयात क्षमता (कीमतों और मात्रा दोनों के प्रभाव सहित)।
प्रश्न 4: क्या डोरेंस को नोबेल मिला?
उत्तर: नहीं।
उत्तर: नहीं।
प्रश्न 5: डोरेंस किस अंतर्राष्ट्रीय संस्था से जुड़े थे?
उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)।
उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)।
प्रश्न 6: Income ToT और Net Barter ToT में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: Net Barter ToT केवल कीमतें देखता है; Income ToT निर्यात मात्रा को भी शामिल करता है।
उत्तर: Net Barter ToT केवल कीमतें देखता है; Income ToT निर्यात मात्रा को भी शामिल करता है।
प्रश्न 7: इस सूत्र की एक सीमा बताएँ।
उत्तर: यह गुणवत्ता में बदलाव को नज़रअंदाज़ करता है।
उत्तर: यह गुणवत्ता में बदलाव को नज़रअंदाज़ करता है।
प्रश्न 8: डोरेंस किस देश के अर्थशास्त्री थे?
उत्तर: ऑस्ट्रेलिया।
उत्तर: ऑस्ट्रेलिया।
प्रश्न 9: डोरेंस ने और किन बैंकों में काम किया?
उत्तर: बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड।
उत्तर: बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड।
प्रश्न 10: ITT बढ़ने का क्या मतलब है?
उत्तर: देश की आयात क्षमता बढ़ गई है – यह लाभदायक है।
उत्तर: देश की आयात क्षमता बढ़ गई है – यह लाभदायक है।
📦 बॉक्स 3 – राउल प्रीबिश (Raul Prebisch, 1901-1986)
🔹 एक लाइन में
प्राथमिक वस्तुओं (कच्चा माल, कृषि उत्पाद) के निर्यातक विकासशील देशों की व्यापार शर्तें (Terms of Trade) लंबे समय में गिरती हैं, जबकि विनिर्मित वस्तुओं के निर्यातक विकसित देशों की व्यापार शर्तें सुधरती हैं। इसलिए विकासशील देश औद्योगीकरण करें और आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution) अपनाएँ।🔹 क्यों आया?
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, प्रीबिश ने देखा कि विकासशील देश (लैटिन अमेरिका) जो कच्चा माल निर्यात करते थे, उनकी व्यापार शर्तें लगातार बिगड़ रही थीं। उन्होंने कहा – यह संरचनात्मक समस्या है, अस्थायी नहीं।🔹 कब और कहाँ?
1950, अर्जेंटीना/चिली (संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग – ECLAC)। रिपोर्ट – "The Economic Development of Latin America and its Principal Problems"🔹 प्रीबिश-सिंगर परिकल्पना के मुख्य बिंदु (परीक्षा में बार-बार)
विकासशील देश (प्राथमिक वस्तुएँ) – ToT गिरता है, कम आय, निर्यात में अस्थिरता, आयात प्रतिस्थापन की सलाह।विकसित देश (विनिर्मित वस्तुएँ) – ToT बढ़ता है, उच्च आय, निर्यात में स्थिरता, मुक्त व्यापार की सलाह।
🔹 क्यों घटती हैं विकासशील देशों की व्यापार शर्तें? (4 कारण – परीक्षा में बार-बार)
1. आय की माँग में अंतर – विकसित देशों की प्राथमिक वस्तुओं के लिए माँग कम बढ़ती है (एंगेल का नियम)।2. तकनीकी प्रगति – विकसित देशों में तकनीक से विनिर्मित वस्तुओं की कीमत कम होती है, लेकिन लाभ उन्हीं को मिलता है।
3. श्रमिक संघ – विकसित देशों में श्रमिक संघ मजदूरी बढ़ा लेते हैं, जबकि विकासशील देशों में नहीं।
4. व्यापार अस्थिरता – प्राथमिक वस्तुओं की कीमतें अधिक अस्थिर (जैसे तेल, कॉफी) होती हैं।
📌 सरल उदाहरण: · 1950 – 1 टन कॉफी (विकासशील देश का निर्यात) के बदले में 10 ट्रैक्टर (विकसित देश का निर्यात) मिलते थे।
· 2000 – 1 टन कॉफी के बदले में केवल 3 ट्रैक्टर मिलते हैं।
· निष्कर्ष: विकासशील देशों की व्यापार शर्तें गिर गईं।
· 2000 – 1 टन कॉफी के बदले में केवल 3 ट्रैक्टर मिलते हैं।
· निष्कर्ष: विकासशील देशों की व्यापार शर्तें गिर गईं।
🔹 प्रीबिश का समाधान (परीक्षा में बार-बार)
1. आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण (ISI) – विकासशील देश अपने लिए विनिर्मित वस्तुएँ खुद बनाएँ, आयात न करें।2. संरक्षणवादी टैरिफ – शुरुआत में उद्योगों को संरक्षण दें।
3. क्षेत्रीय व्यापार संघ – विकासशील देश आपस में व्यापार बढ़ाएँ।
4. प्राथमिक वस्तुओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौते – कीमतों को स्थिर करने के लिए।
🔹 मान्यताएँ (Assumptions)
1. प्राथमिक वस्तुओं की माँग आय के अनुपात में कम बढ़ती है (एंगेल का नियम)।2. विकसित देशों के श्रमिक संघ मजदूरी बढ़ाने में सफल हैं।
3. तकनीकी प्रगति का लाभ विकसित देशों को मिलता है।
4. पूंजी की गतिशीलता सीमित है।
🔹 सीमाएँ (Criticism)
1. हाल के आँकड़े इस परिकल्पना का समर्थन नहीं करते – कई प्राथमिक वस्तुओं (जैसे तेल) की कीमतें बढ़ी हैं।2. चीन जैसे विकासशील देश विनिर्मित वस्तुओं के बड़े निर्यातक बन गए हैं।
3. तकनीकी प्रगति से प्राथमिक वस्तुओं के उत्पादन की लागत भी घट सकती है।
4. यह परिकल्पना ऐतिहासिक डेटा (1870-1938) पर आधारित है – जो आज प्रासंगिक नहीं हो सकता।
🔹 प्रीबिश और सिंगर में अंतर (परीक्षा में पूछा जाता है)
प्रीबिश – लैटिन अमेरिकी संदर्भ (ECLAC), आयात प्रतिस्थापन पर जोर, राजनीतिक अर्थशास्त्री (बाद में UNCTAD प्रमुख), कच्चे माल पर अधिक ध्यान।सिंगर – वैश्विक संदर्भ (UN), अंतर्राष्ट्रीय सहायता पर जोर, शुद्ध अकादमिक अर्थशास्त्री, सभी प्राथमिक वस्तुओं पर।
🔹 ट्रिक याद रखने की
"Prebisch = P for Primary goods (प्राथमिक वस्तुएँ) की ToT गिरती है""Prebisch-Singer = विकासशील देशों के लिए बुरी खबर"
"ISI = Import Substitution Industrialization" – प्रीबिश का समाधान।
🔹 नोबेल?
❌ नहीं (प्रीबिश को नोबेल नहीं मिला)🔹 अतिरिक्त बातें
· प्रीबिश अर्जेंटीनी अर्थशास्त्री थे।· वह संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग लैटिन अमेरिका (ECLAC) के प्रमुख थे (1950-1963)।
· बाद में वह संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) के प्रमुख बने (1964-1969)।
· उनके विचारों को संरचनावादी स्कूल (Structuralist School) कहा जाता है।
· उनकी प्रसिद्ध पुस्तक – "The Economic Development of Latin America and its Principal Problems" (1950)।
❓ बॉक्स 3 के प्रश्न-उत्तर (Raul Prebisch)
प्रश्न 1: Prebisch-Singer Hypothesis क्या बताती है?
उत्तर: प्राथमिक वस्तुओं के निर्यातक विकासशील देशों की ToT गिरती है, विनिर्मित वस्तुओं के निर्यातक विकसित देशों की ToT बढ़ती है।
उत्तर: प्राथमिक वस्तुओं के निर्यातक विकासशील देशों की ToT गिरती है, विनिर्मित वस्तुओं के निर्यातक विकसित देशों की ToT बढ़ती है।
प्रश्न 2: प्रीबिश ने विकासशील देशों को क्या सलाह दी?
उत्तर: आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण (ISI) – अपने लिए विनिर्मित वस्तुएँ खुद बनाएँ।
उत्तर: आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण (ISI) – अपने लिए विनिर्मित वस्तुएँ खुद बनाएँ।
प्रश्न 3: प्रीबिश की मुख्य रिपोर्ट?
उत्तर: "The Economic Development of Latin America and its Principal Problems" (1950)
उत्तर: "The Economic Development of Latin America and its Principal Problems" (1950)
प्रश्न 4: प्रीबिश किस संयुक्त राष्ट्र आयोग के प्रमुख थे?
उत्तर: ECLAC (Economic Commission for Latin America and the Caribbean)।
उत्तर: ECLAC (Economic Commission for Latin America and the Caribbean)।
प्रश्न 5: क्या प्रीबिश को नोबेल मिला?
उत्तर: नहीं।
उत्तर: नहीं।
प्रश्न 6: ToT गिरने के चार कारण बताएँ।
उत्तर: (1) आय माँग में अंतर, (2) तकनीकी प्रगति, (3) श्रमिक संघ, (4) व्यापार अस्थिरता।
उत्तर: (1) आय माँग में अंतर, (2) तकनीकी प्रगति, (3) श्रमिक संघ, (4) व्यापार अस्थिरता।
प्रश्न 7: प्रीबिश किस देश के अर्थशास्त्री थे?
उत्तर: अर्जेंटीना।
उत्तर: अर्जेंटीना।
प्रश्न 8: प्रीबिश बाद में किस संयुक्त राष्ट्र संस्था के प्रमुख बने?
उत्तर: UNCTAD (United Nations Conference on Trade and Development)।
उत्तर: UNCTAD (United Nations Conference on Trade and Development)।
प्रश्न 9: इस परिकल्पना की एक सीमा बताएँ।
उत्तर: हाल के आँकड़े इसका समर्थन नहीं करते – तेल जैसी प्राथमिक वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं।
उत्तर: हाल के आँकड़े इसका समर्थन नहीं करते – तेल जैसी प्राथमिक वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं।
प्रश्न 10: प्रीबिश के विचार किस स्कूल से जुड़े हैं?
उत्तर: संरचनावादी स्कूल (Structuralist School)।
उत्तर: संरचनावादी स्कूल (Structuralist School)।
📦 बॉक्स 4 – हंस वुल्फगैंग सिंगर (Hans Wolfgang Singer, 1910-2006)
🔹 एक लाइन में
प्रीबिश के साथ मिलकर यह परिकल्पना विकसित की कि प्राथमिक वस्तुओं के निर्यातक विकासशील देशों की व्यापार शर्तें लंबे समय में गिरती हैं। सिंगर ने अंतर्राष्ट्रीय सहायता और तकनीकी हस्तांतरण पर अधिक जोर दिया।🔹 क्यों आया?
प्रीबिश की तरह ही, सिंगर ने भी देखा कि विकासशील देशों की व्यापार शर्तें बिगड़ रही थीं। उन्होंने वैश्विक डेटा का विश्लेषण किया और प्रीबिश के निष्कर्षों को और पुष्ट किया।🔹 कब और कहाँ?
1950, जर्मनी/इंग्लैंड। लेख – "The Distribution of Gains between Investing and Borrowing Countries" (American Economic Review)🔹 सिंगर का मुख्य योगदान (परीक्षा में बार-बार)
1. प्रीबिश-सिंगर परिकल्पना को वैश्विक डेटा (1870-1938) से सिद्ध किया।2. तकनीकी प्रगति का लाभ विकसित देशों को क्यों मिलता है – इसकी व्याख्या की।
3. एंगेल का नियम – जैसे-जैसे आय बढ़ती है, भोजन पर खर्च का प्रतिशत घटता है → प्राथमिक वस्तुओं की माँग कम बढ़ती है।
4. अंतर्राष्ट्रीय सहायता (aid) और तकनीकी हस्तांतरण (technology transfer) पर जोर।
📌 सरल उदाहरण (प्रीबिश के समान): 1870-1938 के डेटा से सिंगर ने दिखाया कि प्राथमिक वस्तुओं की सापेक्ष कीमतें (बनाम विनिर्मित वस्तुएँ) लगातार गिर रही थीं। इसका मतलब था कि विकासशील देशों को अपनी प्राथमिक वस्तुओं के बदले में कम और कम विनिर्मित वस्तुएँ मिल रही थीं।
🔹 सिंगर बनाम प्रीबिश (परीक्षा में पूछा जाता है)
प्रीबिश – लैटिन अमेरिका, आयात प्रतिस्थापन (ISI), ECLAC/UNCTAD, अर्जेंटीना।सिंगर – वैश्विक, अंतर्राष्ट्रीय सहायता + तकनीकी हस्तांतरण, UN/IDS, जर्मनी/ब्रिटेन।
🔹 मान्यताएँ (Assumptions)
1. प्राथमिक वस्तुओं की माँग आय के अनुपात में कम बढ़ती है।2. तकनीकी प्रगति प्राथमिक वस्तुओं के बजाय विनिर्मित वस्तुओं में अधिक होती है।
3. विकसित देशों के श्रमिक संघ मजदूरी बढ़ा लेते हैं।
4. प्राथमिक वस्तुओं के बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी हैं (बहुत सारे विक्रेता)।
🔹 सीमाएँ (Criticism) – प्रीबिश के समान
1. हाल के आँकड़े इस परिकल्पना का समर्थन नहीं करते।2. चीन और भारत जैसे देशों ने विनिर्मित वस्तुओं का निर्यात बढ़ाकर यह परिकल्पना तोड़ दी है।
3. तेल जैसी प्राथमिक वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं।
4. यह परिकल्पना 1870-1938 के डेटा पर आधारित है – जो औपनिवेशिक युग का था।
🔹 ट्रिक याद रखने की
"Singer = Same as Prebisch" – दोनों ने एक साथ परिकल्पना दी।"Singer ने Singer को समझा" – सिंगर ने एंगेल का नियम लागू किया।
"Prebisch-Singer = विकासशील देशों की ToT गिरती है, विकसित देशों की बढ़ती है"
🔹 नोबेल?
❌ नहीं (सिंगर को नोबेल नहीं मिला)🔹 अतिरिक्त बातें
· सिंगर जर्मन मूल के ब्रिटिश अर्थशास्त्री थे।· वह यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स में प्रोफेसर थे और इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (IDS) के संस्थापकों में से थे।
· उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में कई पदों पर काम किया।
· वह केन्स के छात्र थे (केम्ब्रिज से PhD)।
· उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें – "International Development: Growth and Change" (1964), "The Strategy of International Development" (1975)।
· उन्हें विकास अर्थशास्त्र का जनक कहा जाता है।
❓ बॉक्स 4 के प्रश्न-उत्तर (H.W. Singer)
प्रश्न 1: Prebisch-Singer Hypothesis में सिंगर का क्या योगदान था?
उत्तर: उन्होंने वैश्विक डेटा (1870-1938) से इस परिकल्पना को सिद्ध किया और अंतर्राष्ट्रीय सहायता पर जोर दिया।
उत्तर: उन्होंने वैश्विक डेटा (1870-1938) से इस परिकल्पना को सिद्ध किया और अंतर्राष्ट्रीय सहायता पर जोर दिया।
प्रश्न 2: सिंगर की मुख्य पुस्तक/लेख कौन सा है?
उत्तर: "The Distribution of Gains between Investing and Borrowing Countries" (American Economic Review, 1950)
उत्तर: "The Distribution of Gains between Investing and Borrowing Countries" (American Economic Review, 1950)
प्रश्न 3: सिंगर ने किस नियम का उपयोग किया?
उत्तर: एंगेल का नियम (Engel's Law) – जैसे-जैसे आय बढ़ती है, भोजन पर खर्च का प्रतिशत घटता है।
उत्तर: एंगेल का नियम (Engel's Law) – जैसे-जैसे आय बढ़ती है, भोजन पर खर्च का प्रतिशत घटता है।
प्रश्न 4: क्या सिंगर को नोबेल मिला?
उत्तर: नहीं।
उत्तर: नहीं।
प्रश्न 5: सिंगर किस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे?
उत्तर: यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स (University of Sussex)।
उत्तर: यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स (University of Sussex)।
प्रश्न 6: सिंगर किसके छात्र थे?
उत्तर: जॉन मेनार्ड कीन्स (John Maynard Keynes) के – केम्ब्रिज से PhD।
उत्तर: जॉन मेनार्ड कीन्स (John Maynard Keynes) के – केम्ब्रिज से PhD।
प्रश्न 7: सिंगर ने किस संस्था की स्थापना में मदद की?
उत्तर: इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (IDS), ससेक्स।
उत्तर: इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (IDS), ससेक्स।
प्रश्न 8: प्रीबिश और सिंगर के समाधान में मुख्य अंतर क्या था?
उत्तर: प्रीबिश आयात प्रतिस्थापन पर जोर देते थे; सिंगर अंतर्राष्ट्रीय सहायता और तकनीकी हस्तांतरण पर।
उत्तर: प्रीबिश आयात प्रतिस्थापन पर जोर देते थे; सिंगर अंतर्राष्ट्रीय सहायता और तकनीकी हस्तांतरण पर।
प्रश्न 9: सिंगर किस देश के मूल निवासी थे?
उत्तर: जर्मनी (बाद में ब्रिटेन)।
उत्तर: जर्मनी (बाद में ब्रिटेन)।
प्रश्न 10: सिंगर को किस क्षेत्र का जनक कहा जाता है?
उत्तर: विकास अर्थशास्त्र (Development Economics) के जनक।
उत्तर: विकास अर्थशास्त्र (Development Economics) के जनक।
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